बारिश की बूँदें | Hindi Poetry

Baarish ki Boondein

Poetry by Abhinav


उठायें ज़रा सर, और आँखों को मूंदें,
इस्तकबाल करें, ये हैं बारिश की बूँदें |
..
रिश्ता इनसे बड़ा पुराना है,
कौन कहता है गुज़र गया वो ज़माना है,
पुरानी बात कह कर, यूँ छाता न खोलें
 इस्तकबाल करें, ये हैं बारिश की बूँदें |
..
बचपन की बारिश अम्मा के लाड़ की थी सौगात,
टिप टिप बूंदों के बुलबुलों में अजब थी कुछ बात
कभी रिक्शा, कभी तांगा, कभी हेलमेट और स्कूटर मिल जाते थे,
किरदार नये नये  पानी के मंच से हम तमाशबीनो को गुदगुदाते थे |
किरदार वही बरस रहे हैं, दीदार करें, ज़रा दिल को टटोलें,
इस्तकबाल करें ये हैं बारिश की बूँदें |
..
दफ्तर तो मानो एक रफ़्तार है,
जिसके पहरेदार बने आप वफादार हैं,
क्यों न इस मझधार में थोड़ा सुकून पिरोलें,
इस्तकबाल करें ये हैं बारिश की बूँदें |
..
वो साइकिल के पेडल और ज़ोर के छींटे अपने थे,
पर गाड़ी की विंडशील्ड के भी तो सपने थे
गुंजाईश नहीं ख्वाइशों को सींचें,
फैलते बादलों के धुएं के काश को खींचे,
रूठी मिटटी को मानती हैं ये सावन की गूँजें,
इस्तकबाल करें ये हैं बारिश की बूँदें |
..
तो क्यों न फिर से आँखों को मूंदें,
पुरानी यादों को फिर से गूंदें,
नहा चुकी पत्तियों से सजे पेड़ों से हाल चाल तो पूंछें,
इस्तकबाल करें ये हैं बारिश की बूँदें |

..

Watch बारिश की बूँदें   narration on YouTube and subscribe to my channel ‘Aatma Mein Ungli’